मुलाक़ात वाला इंतेज़ार

शाम-ए-महफ़िल कहीं काफ़ूर हों गयींउसकी तन्हाई दिल का नासूर हों गयीं शुमार थी हर क़िस्म की ख़ास-ए-शख़्सियत आजदिल बीमार था , कहाँ गयी मेरी मिलकियत आज मलिका…… Read more “मुलाक़ात वाला इंतेज़ार”