ये दिल और दुनिया

मेरी लिखावट दो शब्दों के दरमियाँ है माना मेरी पंक्ति में ज़रा सी कमियाँ है जब भी लिखता हूँ लिखने का जज़्बा कम नहीं होता दिल खोल…… Read more “ये दिल और दुनिया”

सोचा क्या , पाया क्या

सोचा था गुलाबों के शहर में आया हूँकाँटों भरी सेज़ मिली सोचा था हवाओं में बहेंग़े ख़ुशी ख़ुशीआंधियों के थपेड़े मिलें सोचा था अपनो के बीच में…… Read more “सोचा क्या , पाया क्या”