सोचा क्या , पाया क्या

सोचा था गुलाबों के शहर में आया हूँकाँटों भरी सेज़ मिली सोचा था हवाओं में बहेंग़े ख़ुशी ख़ुशीआंधियों के थपेड़े मिलें सोचा था अपनो के बीच में…… Read more “सोचा क्या , पाया क्या”