बेटी वाला घर

इंतेज़ार खतम हुआ , ख़ुशियों की चाबी हाथ लगी हैंघर बेटी आयी हैं , सुखो की सौग़ात हाथ लगी हैं घर की खामोशी किलकारियों में बदल गयी…… Read more “बेटी वाला घर”

एक लेखनी का क्रंदन

मानस पटल की अभिव्यक्ति को जो दे ज्योति मनुष्य की लेखनी से लिखी जाती हैं रामायण, महाभारत जैसी पोथी समानता कोई नहीं , ऐसी हैं इसकी महानतासागर…… Read more “एक लेखनी का क्रंदन”

कविता – अबोध बच्चे की उड़ान

एक अबोध बच्चे ने आज बोला सबसेदुनिया वालों क्या दोगे हमें ये बताओ अब से हम ने तो अभी तुषार भरी आँखें खोली हैंसारा संसार पूरा भरना हैं अपनी इस झोली में सीखना हैं दुनिया चलाने के सारे करतबपूछने हैं बहुत सारे सवाल और उनके मतलब माता पिता के आँखों का सपना बनना चाहता हूँअपनी औक़ात की सही पहचान करना चाहता हूँ आयु हैं छोटी , सपनो की परत हैं मोटीहम हैं पूर्ण समर्थ, बाक़ी बातें सब व्यर्थ बुद्धि में विवेक भरा , सोने जैसा बिल्कुल खरायह दुनिया हैं बिछौना , हम इसका हैं खिलोना बेबाक़ी भरी आवाज़ रहे मुझमेंज़िंदादिली की मिसाल लय रहे मुझमें तराशने होंगे अब मुझे नए नए आयामफ़र्श से अर्श तक पहुँचने तक करना हैं बहुत व्यायाम मेहनत मेरी सिफ़ारिश होगीऐसी ही मेरी परवरिश होगी कुछ देके जाना चाहता हूँ , नहीं सुनना हैं दुनिया का तानाखाया पीया कुछ नहीं गिलास तोड़ा बारह आना शोर मचा खूब घमसान अपने अंदरनहीं बनना हाथ की कठपुतली ना किसी मदारी का बंदर अपने दम पे चलना हैं , यें मुझमें हैं अहमनहीं आंकना कम मुझको , मत रखना ये वहम शर्त ये हैं की जब मेरी बारी आएगीविहंग उडूँगा उस आकाश में , जिस ओर से भी हवा आएगी…… Read more “कविता – अबोध बच्चे की उड़ान”

कविता – ज़हरीला इंसान

भगवान ने बनाया जब इंसानउसको दे दी छोटी सी ज़ुबान बोलने के कुछ क़ायदे थेनिभाने कुछ वायदे थे क़ायदे से थोड़ा बोलना, यही मिली थी सीखबड़बोलापन पड़ेगा…… Read more “कविता – ज़हरीला इंसान”