ये दिल और दुनिया

मेरी लिखावट दो शब्दों के दरमियाँ है माना मेरी पंक्ति में ज़रा सी कमियाँ है जब भी लिखता हूँ लिखने का जज़्बा कम नहीं होता दिल खोल…… Read more “ये दिल और दुनिया”

सोचा क्या , पाया क्या

सोचा था गुलाबों के शहर में आया हूँकाँटों भरी सेज़ मिली सोचा था हवाओं में बहेंग़े ख़ुशी ख़ुशीआंधियों के थपेड़े मिलें सोचा था अपनो के बीच में…… Read more “सोचा क्या , पाया क्या”

एक दिन का श्रोता

मैं हूँ एक भोला भाला सा इंसानरहता था सबसे अनजानदुनियादारी का थोड़ा ना था ज्ञानकम समझदारी से भी था हलाकानबहुत दिनो तक घर पे बैठा सोचा करताक्या…… Read more “एक दिन का श्रोता”

घमंड और अहंकार

दूसरे द्वारा तारिफ़ मिले -सिपाही क़ो अपनी लाल पगड़ी पर सुंदरी को अपने सुंदरता और गहनो पर वैद्य को अपने सामने बैठे हुए रोगियों को देख कर…… Read more “घमंड और अहंकार”