आख़िरी कोरोना

एक दिन का श्रोता

मैं हूँ एक भोला भाला सा इंसानरहता था सबसे अनजानदुनियादारी का थोड़ा ना था ज्ञानकम समझदारी से भी था हलाकानबहुत दिनो तक घर पे बैठा सोचा करताक्या करूँगा आगे , पेट कैसे है भरताहमेशा दूसरों को देता श्रेय अपनी अवस्था कानहीं करता संज्ञान अपनी सही वास्तविकता कारोज़ दर दर की ठोकरें खाता , भूखे पेट ही कभी सो जाताहर पल सही समय के आगमन का सोचताजल्दी मिले हम दोनो, अपने बाल भी नोचता

साल का आख़िरी दिन – २०२०

बीता जो साल ये क्या कुछ दे गयासोचा क्या पाया क्या  ख़ाली गया साल येक्या कुछ बता गयासमय से बलवान क्या रुला गया साल ये क्या कुछ खो गयामृत्यु से अधिक सच क्या डरा गया साल येक्या कुछ ले गयाबढ़ी धड़कन से तेज क्या  अनभिज्ञ नया साल येजाने कैसा जाएगाज़िंदगी से बड़ा क्या  ख़ुशहाली भरा हो साल ये नया अन्दाज़ दिखाएगाअपनो के होने से महत्वपूर्ण क्या  सबको दे नए आयाम खड़ा साल ये अपना वादा ज़रूर निभाएगा अच्छे स्वास्थ्य से सच्चा दोस्त क्या   

शिक्षक – सच्चा मार्गदर्शक

शिक्षा का महत्व जो समझाएकामयाबी की पहली कुंजी जो बन जाएवही सही मायने में शिक्षक कहलाये खुद को खुद से जुड़ने का रास्ता जो दिखलायेआशाओं के दीप…… Read more “शिक्षक – सच्चा मार्गदर्शक”

आख़िरी लालच (ज़्यादा पड़ेगा भारी)

बात मसूरी की है। मैं होटल में रुका था। । क्योंकि नाश्ता का समय साढ़े दस बजे तक ही होता है, इसलिए होटल वालों ने बताया कि…… Read more “आख़िरी लालच (ज़्यादा पड़ेगा भारी)”

मुलाक़ात वाला इंतेज़ार

शाम-ए-महफ़िल कहीं काफ़ूर हों गयींउसकी तन्हाई दिल का नासूर हों गयीं शुमार थी हर क़िस्म की ख़ास-ए-शख़्सियत आजदिल बीमार था , कहाँ गयी मेरी मिलकियत आज मलिका…… Read more “मुलाक़ात वाला इंतेज़ार”

जीवनसाथी -दिया संग बाती

खुशनसीब थे , जो शादी कर लिए अपनो की ख़ुशियों में घोड़ी चढ़ लिये सूना था जहां , जिसके इंतेज़ार में बहारों का मौसम आया, ख़ुशियाँ मिली…… Read more “जीवनसाथी -दिया संग बाती”