जीवनसाथी -दिया संग बाती

 Show delight face

खुशनसीब थे , जो शादी कर लिए
अपनो की ख़ुशियों में घोड़ी चढ़ लिये

सूना था जहां , जिसके इंतेज़ार में
बहारों का मौसम आया, ख़ुशियाँ मिली हज़ार में

क़ुर्बान ना हुए थे अभी तक किसी के लिए
उम्र भर की क़समें ले लिए साथ जीने के लिए

इस क़ाबिल ना थे हम , उस क़ाबिल बनाया आपने
मुझको अपना हाथ देके , मुकम्मल बनाया आपने

अकेला था अपने खाली जीवन में लड़ता भिड़ता
सहारा मिला , जीवन में आयी अथाह नवीनता

कुछ खो के कुछ पाना ही असली परमार्थ (मोक्ष) होता है
उनके आने से मालूम हुआ सच्चा प्यार निहसवार्थ होता है

अगर चारों तरफ़ अंधेरा छा जाए तो क्या दिखायी देता है
वो प्रेम रूपी दीपक जलाकर जीवन में रोशनी भर देता है

जुड़ गए है उनसे हम , नयी आदत सी हो गयी है
रोज़ रब का हुस्न देखे , इबादत सी हो गयी है

कोई अच्छें करम थे हमारे ,जो साथ चलते है
अच्छा हमसफ़र मिल जाए , तो हम खुशहाल फलते है
एक दूसरे – के लिए , के साथ हर रोज़ बदलते है

ग़र वक़्त गया रूठ , तो कौन साथ पहले आयेगा
उसके तीज और व्रत का पराक्रम ही हमारा ढाल बन जाएगा

आगे कौन क्या उखाड़ लेगा, मिलके देख ही लेंगे
ज़िंदगी रूपी कश्ती को किनारे तक टेक ही देंगे

आज भी उसे देखूँ , तो पहली मुलाक़ात याद आती है
उसको पूरा जान पाया, तो खुद के लिये दाद निकल आती है ।

सच तो यह है उस रब से –

मोती माँगा था , समंदर मिल गया
क़ायदा माँगा था, जीने का उसूल मिल गया
रंगों का समा माँगा था, सात रंगो में लिपटा सपना मिल गया
एक फूल माँगा था , पूरा गुलशन मिल गया
एक चहक माँगा था, ख़ुशियों का शोर मिल गया
एक सूरज माँगा था , नन्ही चाँदनी संग मिल गया
छोटी सी दुनिया माँगा था, पूरा जहां मिल गया
साथी माँगा था, जीवन भर का साथी मिल गया

8 thoughts on “जीवनसाथी -दिया संग बाती

  1. बहुत प्यारी कविता जिन्दगी के अनुभव को शब्दों मे बुन दिया

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