नशा हो तो ऐसा

यह दुनिया अब बन गयी है हरिवंश की मधुशाला
हर किसी को नशा खींचता,खुद बन जाते हैं प्याला

भर भर पीते जाम को उछाल उछाल
दम भर के धुएँ के छल्ले उड़ाए बार बार

मन मस्तिष्क जाने किस के जाल में
उतर गया हैं फैलाए झूठ के अपने जंजाल में

कहता हैं रात को नींद नहीं आती
उस लड़की की याद बहुत है सताती
काम के बोझ की आड़ में खुद को परेशान बतलाता
परिवार की चिक चिक का आसान हल चेताता
हर मर्ज़ की दवा मे नशे की मिलावट हैं
कुछ नहीं ये लतख़ोरी की ही तो लिखावट है

सीधा सीधा सच कहने या सुनने की हिम्मत नहीं
बेवक़ूफ़ सब को बनाता , जाने कोई इस से सहमत नहीं
जानूँ मै सब प्रपंच है तेरे अपने फैलाए माया जाल का
सुधर जा वरना , जल्द बन जाएगा इंसान तू कंकाल का

आदत कब लत बन जाए , कौन जाने यें सब
शुरू से ना करने की ठानी होती , शायद बच जाता तब

क्यों करते हो ये नशा जो –
अपनाए क़र्ज़ का साथ , अगली पीढ़ी तक का जलाए हाथ
ले हरदम धोखे का सहारा,सब छिन जाए , छोड़ जाए बेसहारा
उड़ाये सिगरेट का धुआँ , बने मौत का कुआँ
हो ड्रग्स की लत , अवश्य होगा राम नाम सत
करे शराब का नशा , बिगाड़े शरीर की दशा
पीये चिलम का कश , लगे पाखंड का शक

यदि नशा ही करना है तो
अपनाओ-सुबह जल्दी उठने की चाह , अच्छा जीवन फैलाए बाँह
सवेरे की सैर और कसरत , पूरा दिन मौज करे भरसक
प्रभु की आराधना , आत्मा भी करे उसमें साधना
रामायण,गीता की चौपाइयों का दौर, खिलाए सात्विक सोच वाला कौर
दृढ़ संकल्प की राह , दे अच्छी आदतों को पनाह
सामान्य ज्ञान का निरंतर अध्ययन, दिखेगा रुचि सबमें हरदम
कविता का रस , मन कभी ना बोले बस
काम में डूब जाना , बुरी बातों का डर मिटाना
आज़ादी की भूख , दिल में क्रांति और हाथ में बंदूक़
ख्वाहिशों को पाने की होड़, कामयाबी से मिलाने वाला मोड़
समाज की सेवा का उठाओ बीड़ा, उनका आशीष पाओ और समझो उनकी पीड़ा

इन सब बातों का रसपान लो
आदत बदल दूसरो से सम्मान लो
हारना तब आवश्यक है जब लड़ाई अपनो से हों
जीतना तब आवश्यक है जब लड़ाई खुद से हो
मंज़िले मिले, यें तो मुक़द्दर की बात है
हम कोशिश ही ना करे यें तों ग़लत बात हैं ।

3 thoughts on “नशा हो तो ऐसा

  1. positive thinking hi saphalta ki phli seedhi hi…
    Nice Thoth….
    Mere khyal se “kya Maya jal se nikalna hi iska smadhan hi” ya us jaal ko ulajhne mat do…..
    It’s totaly depends all around family member !

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