आख़िरी फेरा

हम जिस कल्यूगी दुनिया मे जी रहे हैं उसका हर स्वरूप जानने के लिए हर एक मन की समझ रखनी होगी । क्योंकि कुछ मन तो स्वच्छंद पक्षी सा आसमान में नयीं उड़ान भर रहे हैं और कुछ मन पुराने ढर्रे की बेड़ियों में बँधे हैं।

यह कहानी शुरू होती हैं एक गाँव से जहाँ मुखिया का बेटा शादी के मण्डप में अपने आने वाले नए मेहमान के ख़यालों में गुम सा था। और दूसरी ओर एक नए रस्म की शुरुआत को स्वरूप देने के लिए मुखिया की पढ़ीं लिखी बहू कुछ सकुचाई अन्दाज़ में बैठी थीं।

शादी के मण्डप में बहुत सारे लोग मौजूद थे । मुखिया ने हर घर को निमंत्रण दे डाला था , और क्यों ना हो आख़िर एकलौते बेटे का ब्याह जो था। पूरा समाज नयी बहु को देखने और आशीर्वाद देने उमड़ा था । सभी के मुख पर तारिफ़ पहले से ही थी । सुना था , नयीं बहु बहुत समझदार और सलीक़े वाली हैं , घर को बाँध कर रखेगी। पढ़ाई में भी अव्वल थीं और रसोई की भी बहुत समझ थी। लेकिन आज ऊपर वाला खाने के तड़के से ज़्यादा , जीवन में तड़के के लिए तत्पर था ।

आज का मौसम खुला था नयीं संभावनाओं को जनम देने के लिये। तभी पण्डित ने महूरत को देखते हुए कन्या को बुलवाया। पूरा गाँव जिस पल के इंतज़ार में था , वो अब आ गया था।

तभी पंडित ने पूरे समाज और नए दम्पत्ति से कहा-

वैसे तो वैदिक संस्कृति के अनुसार मनुष्य के जन्म से लेकर मरणोपरांत तक सोलह संस्कारों का निबाह किया जाता है। इन्हीं संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है विवाह संस्कार। विवाह दरअसल एक ऐसी संस्था है जिससे समाज की प्रथम इकाई यानि कि परिवार का आरंभ होता है। विवाह के बिना मनुष्य अधूरा माना जाता है। हिंदूओं में विवाह के दौरान आप अक्सर देखते हैं कि वर वधु अग्नि के चारों और चक्कर लगाकर फेरे लेते हैं। सात फेरे में हर फेरे के साथ ब्राह्मण मंत्रोच्चारण करता है और वर वधु से एक वचन लेता है। हिंदू धर्म में विवाह के सात फेरों का बहुत महत्व है. फेरों के दौरान सात वचनों को बोला जाता है, जिसका पालन सभी जोड़े को करना होता है. यह वचन अग्नि और ध्रुव तारा को साक्षी मानकर लिये जाते हैं।

तभी नयीं बहू ने एक अपनी एक बात से सभी को चौका दिया । उसने आठवें वचन की बात रखी। और वो था आज के समाज के बीच छुपी बुराई को ख़त्म करने की , जो परिवार के बीच में ही शुरू होता हैं, जिसकी मूल जड़ हमारे घर में ही पलती हैं। आने वाली पीढ़ी को सबका साथ , सबका सम्मान , समान इज़्ज़त (ख़ासतौर से औरतों , बहनों और माँओं का) , संस्कार और अनुशासन का पाठ देने का। सबको एक समान इंसान की तरह देखने की नसीहत। एक अच्छे नागरिकों वाले सारे गुर प्रदान करने का।

यह सुन के मुखिया के बेटे ने अपनी पत्नी पे गर्व करते हुए पूरे सात वचन के बाद आँठवा वचन को पत्नी संग दोहराया और एक अच्छे परिवार का निर्माण करने की सौगंध ली।

7 thoughts on “आख़िरी फेरा

  1. बहुत सुंदर इस कलयुगी दुनिया मैं हर नारी को ऐसा होना चाहिए

  2. Nice thoughts and good line about eighth step . Seriously, important steps to be taken by each family for better tomorrow in the form of well cultured child..

  3. Eighth phera :Naitik shiksha Ka paath to schoolon se gayab ho gaya hi…ab to aakhri ummnid parents aur Ghar hi hi
    Me BHI koshis krta hu …Jo hamne sheekha hi use aane wali peedhi BHI shekhe

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