देश – प्रथम

कितना कुछ देश ने दिया हैं
हमने देश के लिये क्या किया हैं

सोचो मत अब आगे बढ़ो
देश की क़िस्मत को नया गढ़ो

बहुत हुई पुरानी नीति रीती की राह
बदलता भारत को अब देखने की है चाह

माना राह कांटो से भरी सेज हैं
सम्भाल के चल दुश्मन हमसे ज़्यादा तेज़ हैं

माहौल का पूरा आकलन कर लो
जी भर के श्वास का फाहा भर लो

अपनी मंज़िल की राह पकड़ लो
कोई तुम्हें रोके अगर उसे जकड़ लो

ले लपक दे धपक दिखा दो अपनी शक्ति
शूल चढ़ा है आज भाल पर , हो तुम वीर व्यक्ति

छिन्न भिन्न कर दो उसे तुम ,आज तो अपना वक़्त हैं
कल की सुबह अजब ही होगी , यम भी अपना भक्त हैं

लहु का रंग किसी ने बदलते नहीं देखा
मरा हुआ शहीद कभी किसी ने चलते हुए नहीं देखा

चलती है तो बस उनकी बहादुरी के क़िस्से
सबक़ सिखाते,दम दिखाते ,कर दिए अपने टुकड़े हिस्से
कोई ना रोएगा यहाँ, है फ़क़्र हमें खूब उन पर
नाज़ करता होगा हर देशप्रेमी,आज सूरज डूबा जिस घर

शांति का झंडा फेहरा वो हँसता हुआ गगन विलीन हुआ
देश का मस्तक ऊपर करने वाले, देख दुश्मन गमगीन हुआ

क़सम है मातरे वतन की , मिट्टी में उन्हें मिलना होगा
जितने घाव लगे है तन पे , उन्हें अब सिलना होगा

हर कतरे को जोड़ लिया है मैंने , खूब लहू बहाऊँगा
हर ज़र्रे ज़र्रे से बोल दिया है मैंने , अगले साल अब घर ना आ पाऊँगा

माँ को कहना तेरा सपूत था दफ़्न हों गया फ़र्ज़ की राह में
कोई दुश्मन ना बचा मेरे आड़े , गिरा मौत की बाँह में

ओ मेरे देश वसियों-
डर हटा , निर्भय बन जा , हिम्मत पिघला , शमशीर उठा
गाज गिरा , गाज गिरा , गाज गिरा , बस गाज गिरा

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