घमंड और अहंकार

दूसरे द्वारा तारिफ़ मिले
सिपाही क़ो अपनी लाल पगड़ी पर
सुंदरी को अपने सुंदरता और गहनो पर
वैद्य को अपने सामने बैठे हुए रोगियों को देख कर
किसान को अपने लहराते खेत देख कर
माँ -बाप को अपने बच्चों की ऊँचाई छूने पर
किसी देशवासी का दूसरे देश मे नाम होने पर
जो अनुभूति होती हैं उस चरम को घमंड कहते हैं

अपने द्वारा की तारिफ़ जैसे –
अपना ज्ञान सर्वोपरी मानने पर

खुद की तारीफ़ों के पुल बनाने पर
दूसरों को खुद से नीचा दिखाने पर
खुद के हैसियत और रुतबा में ऊँचा होने पर
दूसरे की इज़्ज़त को खेल खेल मे उछालने पर
जो अनुभूति आपके भीतर होती हैं , उसे अहंकार कहते हैं

यदि दोनो का अर्थ एक और दोनो समान हैं, तो कैसे होगा मार्गदर्शन
समझना ये हैं कि अहंकार एक दोष हैं और घमंड उसका प्रदर्शन
एक कारण हैं और तो दूसरा कार्य है
किंतु दोनो ही पतन का मार्ग हैं

दूसरे यदि आपकी तारिफ़ करे तो आपके लिए घमंड कहलायेगा
आप अपनी तारिफ़ खुद करेंगे तो अहंकार कहलायेगा

घमंड और अहंकार का रिश्ता हैं बहुत अटूट
सब इसके फेर मे आ जाते हैं , अक्सर इंसान जाता हैं टूट
अहंकार में तीनो गए बल, बुद्धि और वंश

ना मानो तो देख लो रावण , कौरव , कंस
इन सब मे से जब कोई नहीं हैं अछूता

हमने कैसे सोच लिया हम बच जाएँगे , क़िस्मत उनका फूटा
जो इंसान इसे नहीं समझता , उसका सोच मोड़ना पड़ता हैं

किसी का घमंड समय के साथ टूट जाता हैं , किसी का तोड़ना पड़ता हैं

ऐसे ही –
भीम को भी था घमंड उसके पास है दस हज़ार हाथियों की शक्ति

उसका घमंड तोड़ने स्वयं हनुमान ने भीम का रास्ता रोका, आख़िर देखनी थी उसकी भक्ति
हनुमान बोले –
रस्ते मे मैं पड़ा हूँ

फ़क़ीर मै बड़ा हूँ
मेरी पूँछ हैं थोड़ी लम्बी
हटा दे ज़रा जल्दी

तू तो हैं बड़ा बलवान
दिखता बड़ा पहलवान
भीम ने एड़ी चोटी का ज़ोर लगाया
पसीना छूट गया , पर पूँछ हिला भी ना पाया ।

भीम बोला –
अपने पे लज्जित हो चुका हूँ ,
भूतल पर पड़ा हुआ हूँ
आपके समक्ष मेरी शक्ति क्यों क्षीण हुई
हाथियों सा बल था , शक्ति मेरी क्यों विलीन हुईं
कौन हैं आप मुनिवर , क्यों ली मेरी परीक्षा
आपका दास बना अब , कर दीजिए मेरी समीक्षा

आया समक्ष फ़क़ीर , हनुमान बन बैठा
अब समझ आया भीम को , भूतल पे कौन था लेटा
मुझे अपने घमंड पे गहरा दुःख हैं

आपके द्वारा आँखें खुली , यही मेरा परम सुख हैं I

समय समय पर चक्षु खोलने आए धरती पर ऐसे वीर
कर दिया घमंड चकनाचूर , ऐसे थे वो धीर
गोवर्द्धन उठा के कृष्णा ने इंद्र का घमंड तोड़ा था
धनुष उठा के राम ने परशुराम का घमंड तोड़ा था

इज़्ज़त और ग़ुरूर में धागे भर का फ़ासला होता हैं
दोनो को अलग रख आगे बढ़ना, यही अच्छा फ़ैसला होता है

अहंकार हो या घमंड दोनो ही नीचता का प्रमाण हैं
जहाँ इंसान स्वयं पूजे जाए , वहाँ दोनो का होना एक समान हैं ।

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