करतब समय का

समय से
प्रातः का भोर , लगे मन साफ़ और विभोर
समय से
सूरज की उगाही , लगे उजालो की सुराही
समय से
साँझ की बेला , लगे फ़ुर्सत का फेरा
समय से
रात का प्रहर , लगे सपनो का शहर
समय से
चाँद की छटा , लगे मदमस्त घटा
समय से
तारो की टिमटिम , लगे जुगनु बरसे रिमझिम
समय से
झींगुरों का शोर , लगे आतंक का डोर
समय से
शादी की शहनाई , अतीत की विदायी
समय से

शिक्षा का स्वीकार, लगे सम्भव जीवन और मिटाए मन के विकार

असमय ही
दिल हारना , मन से किसी को वारना
असमय ही
बादल गरजना , लगे दिल का बैठना
असमय ही
किसी का टपकना , लगे आनंद का बहकना
असमय ही
बिल्ली का विलाप , अमंगल की थाप
असमय ही
बिजली गुल होना , रात जैसा बिल्कुल होना
असमय ही
दहेज का आग़ाज़ हों , अनचाहा बवंडर वो
असमय ही
किसी की मरण , यम की शरण
असमय ही
ज़मीन फटना , एक गम्भीर घटना
असमय ही
मंगल भारी होना , बाज़ी हारी होना

यह सब हैं समय के साथ हमारे वास्तविक जीवन में होने वालें घटित उदाहरण
यही सच हैं सत्य है , यही हैं समय का असली दर्पण

किसने देखा समय को , किसे दिया दिखायी
दिवस , घड़ी और पल होते है इसकी इकाई

कौन समझे समय को , किसने देखा हैं कल
कितना कुछ छिपा हैं वक़्त में ,पहले जी लो ये छोटे छोटे पल

समय की तुलना तो धन से की गयी हैं
पूजा हवन भी फल देते हैं , अगर मन से की गयी हैं

समय से बड़ा दोस्त नहीं, समय से बड़ा दुश्मन कहाँ
वक़्त दिखाए अपने पराए की समझ , इसके जैसा गुरु कहाँ

दल हो या दिल में लगी आग हो ,पल दो पल में लगता हैं
बुझते बुझते एक ज़माना उसमें सुलगता है

कहते हैं समय से ज़्यादा कोई बलवान नहीं होता
अच्छे अच्छे उदाहरण निपट गए, कोई उस जैसा पहलवान नहीं होता

समय का क्या तोड़ हैं , वो जिसे चाहे निचोड़ दे
किसी को एक दाना तरसा दे , किसी पे धन को बरसा दे
किसी की क़िस्मत को चमका दे , किसी की विरासत को पसरा दे
किसी को अपना महत्व समझा दे , किसी के दिलों की एक एक धड़कन गिनवा दे
किसी पे दुःखों का बोझ कर दे , किसी महल को पल भर में जमीदोज कर दे
यें तो रेत की ढेरी जैसी हैं , कसी मुट्ठी में से खिसक ही जाती हैं
किसी को छोटी सी बात और किसी को जीवन भर की यादें दे जाती हैं

चाहे किसी का वनवास हो, चाहे तपस्या से प्राप्त ज्ञान हों
चाहे माँ बनने का इंतेज़ार हो ,चाहे साप्ताहिक बाज़ार हो
चाहे युद्ध का काल हो , चाहे बिना पीये खाए अकाल हो
चाहे परीक्षा का जंजाल हो,चाहे अस्पताल का इलाज हो
चाहे नया साल की घड़ियाँ हो , चाहे कुछ नया सीखने को तैयार हों
वक़्त तो सभी में ही लगता हैं, किसी मे थोड़ा ज़्यादा किसी मे थोड़ा कम लगता है

बुरा वक़्त अच्छे वक़्त की परछाई हैं , वो हमेशा हमसे आगे रहता हैं
वो आएगा और ज़रूर आएगा
सब ग़लत को ठीक ठाक कर के वो फिर चला जाएगा
हम रोते हैं बुरे वक़्त के आने से , पर वो आता कहाँ से
हम ही है इसके पालनहार और जनक , समझ लो अपने ज्ञान से

समय से ज्ञान मिलता हैं , ज्ञान से समझ
और समझ से ही अनुमान मिलता हैं और अनुभव का दरस
अनुमान ग़लत हो सकता हैं पर अनुभव कभी ग़लत नहीं होता
क्योंकि अनुमान हमारे मन की कल्पना हैं और अनुभव हमारे जीवन का सीख होता
अनुभव समय के साथ बड़ता हैं
हमारे क़द और हमारे पद को गड़ता हैं

समय के आगे एक और समय खड़ा हैं बाहें फैलाए
थाम लीजिए हाथ , ना छूटेंगा साथ , एक दफ़ा हाथ तो बढ़ाए

समय से परे कुछ नहीं , सब रह जाएगा यहीं धरा
जो ना नष्ट करे इसे , जीवन का घट रहेगा सदा भरा

5 thoughts on “करतब समय का

  1. Nice Poem… We have to earn some knowledge from time which is truly described here… Bravo !! Keep it up..

  2. Yes
    Time is Very Important in Our Life.
    Once Time Left it Never Comes.
    हमे समय का सदुपयोग करना चाहिए

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