कविता – आख़िरी कोरोना

कब से सुन रहा हूँ कोरोना कोरोना
अब घर पे ही दिन बिताओ , कहीं फिरोना फिरोना ।

जब सबको मालूम हुआ , तब हो गयी थी बड़ी देर
कोई नहीं गया शमशान , शहर मे हैं अब लाशों के ढेर

कोई नहीं पहचान उनकी , जिनको वाइरस ने पकड़ा 
क्वारंटाइन के नाम पे उनको घर में ही जा जकड़ा 

ढेर हो जाओगे मरते मरते , क्यों बढ़ा रहे हो अपना डर
ओह इंसान अब सम्भाल जा , पहले अपनी रक्षा तो कर

चाइना ने पैदा किया , उसने की थी बड़ी गलती
अब तू क्यों लाद के घूम रहा हैं,थामे रहो ज़िंदगी चलती 

अब आयी इटली की बारी , मौत ने वहाँ चादर तानी 
ऐसा मंज़र देखा सबने , भयावह हो गयी धरती सयानि 

सारे देशों की हैं हालत ख़राब, बढ़ रहा हैं विनाश
सब गिनती में लगे हैं , कौन आगे हैं गिनने में लाश ।

यह महामारी हैं , यहाँ सब चीन के विरूद्ध हैं 
जो लड़ा गया बिन हथियार के , सही से देखो यही तृतीय विश्व युद्ध हैं

किसने सोचा था ऐसा भी दिन देखना पड़ेगा 
मत लो इसे बिल्कुल मज़ाक़, यें बहुत ही भारी गिरेगा । 

कल की ही बात थी , सबने मनाया था नया साल
सब की दुआ पर भारी पड गया कोरोना , कैसे करें किसी की देखभाल । 

क्यों कर रहे हो तेरा मेरा , राजनीति से ऊपर उठो नेताओं
क्या किया और क्या दिया , इस चीज़ का हिसाब बताओ 

अपने चिकित्सकों और पुलिस पर करो भरोसा , कुछ नहीं बिगड़ेगा
वो बन गए हैं अब देवदूत , यें सोच महंगा नहीं पड़ेगा

सरकार ने उठाए हैं गम्भीर कदम , हमें जीतना ही होगा
महामारी का ये दंश हैं , इसे खतम करना ही होगा।

क़हत कबीर सुन भाई साधूँ , बात कहूँ मैं खरी
वो दिन भी ज़रूर आएगा , जब धरती हो जाएगी हरी भरी

सामर्थ्य पे रख अपने विश्वास तू , नहीं पड़ो कमजोर
जब समय आएगा पगले, लगा लेना ऐडी चोटी का ज़ोर

4 thoughts on “कविता – आख़िरी कोरोना

  1. Agar dwa nhi Mili to ….samjh jao
    Sansar ki aakhri bimari “Kavita Ka shirshak hogi”

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