मुलाक़ात वाला इंतेज़ार

शाम-ए-महफ़िल कहीं काफ़ूर हों गयींउसकी तन्हाई दिल का नासूर हों गयीं शुमार थी हर क़िस्म की ख़ास-ए-शख़्सियत आजदिल बीमार था , कहाँ गयी मेरी मिलकियत आज मलिका…… Read more “मुलाक़ात वाला इंतेज़ार”

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जीवनसाथी -दिया संग बाती

खुशनसीब थे , जो शादी कर लिए अपनो की ख़ुशियों में घोड़ी चढ़ लिये सूना था जहां , जिसके इंतेज़ार में बहारों का मौसम आया, ख़ुशियाँ मिली…… Read more “जीवनसाथी -दिया संग बाती”

सोचा क्या , पाया क्या

सोचा था गुलाबों के शहर में आया हूँकाँटों भरी सेज़ मिली सोचा था हवाओं में बहेंग़े ख़ुशी ख़ुशीआंधियों के थपेड़े मिलें सोचा था अपनो के बीच में…… Read more “सोचा क्या , पाया क्या”

एक दिन का श्रोता

मैं हूँ एक भोला भाला सा इंसानरहता था सबसे अनजानदुनियादारी का थोड़ा ना था ज्ञानकम समझदारी से भी था हलाकानबहुत दिनो तक घर पे बैठा सोचा करताक्या…… Read more “एक दिन का श्रोता”